लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 12 of 124

पादांगुलीनिहितदृष्टिमपत्रपिष्णुं दूरादुदीक्ष्य रसिकेन्द्रमुखेन्दुविम्बम्। वीक्षे चलत्पदगतिं चरिताभिरामां झंकारनूपुरवतीं वत कर्हि राधाम्॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (15) पदंगुलिनिहिता दृष्टि मापत्रपिश्नुं दुर्दुदिक्ष्य रसिकेन्द्रमुखेन्दुविम्बम्। विक्षे चलत्पादगतिं चरित्रभिरं झंकरणुपुरावतिन वट करहि राधम।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (15)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि