श्री राधा सुधा निधि
Radha Sudha Nidhi
श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 124 verses · Sanskrit
- 1. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 2. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 3. कोटि-कोटि जगद्भासि नखचन्द्र मणिच्छटे।
- 4. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 5. यस्याः पदरसानन्दा कोटयं शेनापि नो समाः।
- 6. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 7. सर्वज्ञोपि परेशोपि मुग्ध मुग्धोति नीचवत्।
- 8. हा राधे प्राण कोटिभ्योऽप्यति प्रेष्ठ पदाम्बुजे।
- 9. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 10. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 11. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 12. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 13. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 14. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 15. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 16. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 17. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 18. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 19. त्वत्सेवा रीतिराश्चर्य लोकवेद-विलक्षणा।
- 20. (कवित्त)
- 21. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 22. रस औ लुनाई की सार है नवेली बाल,
- 23. त्वमेव स्वपदाम्भोज रस-चर्त्मनि मे मतिम्।
- 24. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 25. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 26. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 27. प्रेमामृत रसानन्द मकरन्दौघ वर्षिणीम्।
- 28. भूत्वाति सुकुमाराङ्गी किशोरी गोप कन्यका।
- 29. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 30. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि, दूरहि सों दुरियायौ।
- 31. विदग्ध सुन्दरी-बृन्द वर चूडामणे कदा।
- 32. हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी।
- 33. (कुण्डलिया)
- 34. वैष्णवानन्दकोटिर्वा ब्रह्मानन्दादि कोटयः।
- 35. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 36. सर्वे धर्माममाधर्माः सर्वसाधुमसाधु मे।
- 37. किं करोमि क्क गच्छामि कस्य पादे लुठाम्यहम्।
- 38. वैकुण्ठादि पदं काम्यमपि तुच्छं मतं मम।
- 39. श्रीराधे त्वपदाम्भोज पराग-परिरञ्जिते।
- 40. यतन्तु कृतिनो यज्ञः तपः स्वाध्याय संयमैः।
- 41. न त्वं वैकुंठ लोकेपि न व ते रसदा प्रिय:।
- 42. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 43. यद्यप्यानन्द साम्राज्यं सर्वलीला कृतिष्वपि।
- 44. लोकवेद पथं त्यक्त्वा तवैव चरणाम्बुजम्।
- 45. अस्तु वामास्तु वा राधे कोटि जन्मान्तरेऽपि मे।
- 46. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 47. सर्वथा सार सारैक नखचन्द्र-सुधालवे।
- 48. अनाथं पतितं मूढं त्वदेक-पद जीवनम्।
- 49. राधे त्वद्दास्य पदवी सर्व भक्तश्च दुर्गमा।
- 50. सर्व मर्य्यादयातीत सर्वेशाधिक वैभवे।
- 51. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 52. (कवित्त)
- 53. (छप्पय)
- 54. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 55. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 56. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 57. (कवित्त)
- 58. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 59. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 60. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 61. एक बार हू लेहि मुख, राधा-राधा नाम।
- 62. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 63. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 64. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 65. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 66. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 67. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 68. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 69. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 70. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 71. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 72. राधानामैव कार्यं ह्यनुदिन मिलितं साधनाधीश कोटि स्त्याज्यो नीराज्य राधा
- 73. (कवित्त)
- 74. जे नहि लोक वेद गति जानहिं।
- 75. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 76. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 77. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 78. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 79. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 80. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 81. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 82. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 83. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 84. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 85. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 86. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 87. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 88. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 89. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 90. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 91. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 92. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 93. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 94. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 95. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 96. कदा मधुर सारिका: स्वरस पद्यमध्यापय - त्प्रदाय कर तालिका: क्वचन् नर्त्त
- 97. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 98. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 99. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 100. (कवित्त)
- 101. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 102. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 103. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 104. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 105. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 106. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 107. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 108. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 109. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 110. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 111. प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ।
- 112. नव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान।
- 113. याही रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार।
- 114. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 115. (कवित्त)
- 116. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 117. कालिन्दी-कूल-कल्प-द्रुम-तल निलय प्रोल्लसत्केलिकन्दा, वृंदातव्यं सदैव प
- 118. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 119. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 120. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 121. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 122. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 123. लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
- 124. अलं विषय वार्तया नरक कोटि वीभत्सया