लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 25 of 124
मंजुस्वभावमधिकल्पलतानिकुंजं व्यंजंतमद्भुतकृपारसपुंजमेव।
प्रेमामृताम्बुधिमगाधमबाधमेतं राधाभिधं द्रुतमुपाश्रय साधु चेत॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (27)
मंजुस्वाभावमधिकल्पलत्निककुंजं व्यंजंतमद्भूतकृपारस्पंजमेव। प्रेममृतंबुधिमगधमेत्ना राधाभिधान द्रुतमुपाश्रय साधु चेत.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (27)