श्रीराधे त्वपदाम्भोज पराग-परिरञ्जिते।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 39 of 124

श्रीराधे त्वपदाम्भोज पराग-परिरञ्जिते। वृन्दारण्ये रसमये देहि मे निश्चला रतिम्॥ - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (47) श्रीराधे त्वपदंभोज पराग-परिरंजिते। वृन्दारण्ये रसमये देहि में निश्चल रतिम.. - श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (47)
वैकुण्ठादि पदं काम्यमपि तुच्छं मतं मम।यतन्तु कृतिनो यज्ञः तपः स्वाध्याय संयमैः।