लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 69 of 124
कदा वृन्दारण्ये मधुर मधुरानन्द रसदे,
प्रियेश्वर्य्या केलीभवन नव कुञ्जानी मृगये।
कदा श्रीराधाया: पद-कमल माध्वीक लहरी,
परीवाहैश्चेतो प्रपैलो मधुकरमधीरं मदयिता॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (137)
यदा-कदा वृन्दारण्ये मधुरानन्द रसदे, प्रियेश्वर्य केलिभवं नव कुंजनि मृगये। कदा श्रीराधाय: पद-कमल माधविक लहरी, परिवाहश्चेतो प्रपैलो मधुकर्मधीरना मदैता। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (137)