लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 77 of 124

न देवैर्ब्रह्माद्यैर्न खलु हरिभक्तैर्न सुहृदा- दिभिर्यद्वै राधा - मधुपति - रहस्यं सुविदितम्। तयोर्दासीभूत्वा तदुपचित केली-रस-मये, दुरन्ता: प्रत्याशा हर-हर दृशोर्गोचरयितुम्॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (१४८) न देवैर्ब्रह्मद्यार्न खलु हरिभक्तार्न सुहृदा- दिभिर्याद्वै राधा-मधुपति-रहस्सिं सुविदितम्। तयोर्दशिभूत्वा तदुपसीत केलि-रसा-मये, दुरन्तः प्रत्यशा हर-हर दृष्टोर्गोचरायितुम। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (148)
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