लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 90 of 124

कालिन्दी-तट-कुञ्जे, पुञ्जीभूतं रसामृतं किमपि। अद्भुत केलि-निधानं, निरवधि राधाभिधानमुल्लसति॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (198) कालिंदी-तता-कुन्याजे, पुण्यजीभूतं रसामृतं किमापि। अद्भुत केलि-निधान, निरावधि राधाभिधानमुल्लासति.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (198)
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