कदा मधुर सारिका: स्वरस पद्यमध्यापय - त्प्रदाय कर तालिका: क्वचन् नर्त्त

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 96 of 124

कदा मधुर सारिका: स्वरस पद्यमध्यापय - त्प्रदाय कर तालिका: क्वचन् नर्त्तयत्केकिनम्। क्वचित् कनक वल्लरीवृत तमाल लीलाधनं, विदग्ध मिथुनं तदद्भुतमुदेति वृन्दावने॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (221) कदा मधुर सारिका: स्वरस पद्यमाध्यपय - तप्रदाय कर तालिका: क्वाचं नर्तत्तैकिनम्। क्वचित कनक वल्लारीवृत तमाल लीलाधन, विदग्ध मिथुनं तद्दभूतमुदेति वृन्दावन। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (221)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि