राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 28 of 51
राधा राधा जे कहैं, ते न परे भव-फंद।
जासु कंध पर कमलकर, धरे रहत ब्रजचंद॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
राधा, जहाँ राधा है, उससे परे कोई भय नहीं। कंधे पर कमल धरे जसु, मुझको धरे ब्रजचंद.. - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (4)