राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 27 of 51
(कवित्त)
फटिकसिलान के महल महारानी बैठी,
सुरन की रानी जुरि आई मन-भावतीं। [1]
कोऊ जलदानी पानदानी पीकदानी लिए,
कोऊ कर बीनै लै सुहाये गीत गावतीं॥ [2]
कोऊ चौंर ढारैं चारु चाँदनी-से चौजबारे,
'हठी' लै सुगंधन-सी अलकैं बनावतीं। [3]
मोतिन के मनिन के पत्रन के प्रवालन के,
लालन के, हीरन के हार पहिनावतीं॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (24)
(कविता) फटिकासिलन के महल में बैठी रानी, सूरन की रानी, जुरी ओ मन-भवतिन। [1] कुओ जल्दी पिक्कदानी झूठ, कुओ कर बिनै लै सुहाए गीत गावतिं.. [2] कुओ चौंर धरैं चारु चांदनी-से चौजाबारे, 'हाथी' ला सुघड़ना-जैसी अलकन बनावतिन। [3].