राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 30 of 51
राधा-राधा कहत है, जे नर आठो याम।
ते भव सिंधु उलंघी के, बसत सदाँ ब्रजधाम॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक
राधा-राधा कहती हैं, जे नर आठो यम्। ते भव सिन्धु उलंगी के, बसत सदन ब्रजधाम.. - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक