बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 40 of 51

(कवित्त) चामीकर चौकी पर चंपक-वरन 'हठी' अंग चमकै चारु चंचलै चलावती। [1] तारा सी तरंगना सी अतर लगावै रति, मुकुर दिखावै विजै बीजन डुलावती॥ [2] कमला करनि जोरै, बिमला सुतृन तोरै, नवला लै मरजी को अरजी सुनावती। [3] सुरन की रानी, सुरपालन की रानी, दिगपालन की रानी द्वार मुजरा न पावती॥ [4] - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (21) (कविता) चमत्कारिक छंद पर चंपक-वरण 'हाथी', चंचलता से दमक रहा शरीर। [1]. [3] सुरन की रानी, ​​सुरपालन की रानी, ​​दिगपालन की रानी द्वार मुजारा न पावति.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (21)
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