बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 39 of 51
(कवित्त)
बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में,
कहाँ लौ बखानौं, सुंदराई सिरताज की। [1]
चाँदनी की, चंपक की, चंचला चमीकर की,
इंदमा, तिलोत्तमा की सोभा कौन काज की॥ [2]
मोतिन के हार गरें, मोतिन सौ माँग भरै,
मोतिन सौं बेनि गुही हठी सुखसाज की। [3]
चाल गजराज, मृगराज की-सी लंक दुज,
राज-सौ वदन, राजै रानी ब्रजराज की॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (18)
(कविता) रंगों से भरी बैठी है रावटी, लौ कहाँ दिखाऊँ, मुकुट की शोभा। [1] चांदनी, छनपाक, चंचला चमकर, इंदामा, तिलोत्तमा की सुंदरता किसी काम की नहीं है.. [2] मोतिन घर-घर में है, मोतिन मांग भरी है, मोतिन सौ-सौ सुखों के हाथी हैं। [3] चल गजराज, लंक दूज जैसे मृगराज, राजा-सौ वदन, राजाई रानी ब्रजराज की.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (18)