बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 51 of 51
(सवैया)
रम्भा रमासी उमासी ‘हठी’ विमला नवला रति रूप छली सी। [1]
चाँदनी चम्पा चमीकर सी चपला चमकाहत जात घली सी॥ [2]
भागन आज लखी भरी नैनन रावरी आवत देखि भली सी। [3]
जात चली गली भानुलली अली मंजुल कोमल कंज कली सी॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (83)
(सवैया) रंभा रामसी उमासी 'हाथी' विमला नवला रति रूप कपति। [1] चाँदनी दीपक सी चमक रही है, गाली सी चमक रही है.. [2] भगन, आज भारी आँखों से देखो, आँखों में बारिश आ रही है। [3] जात चली गली भानुलाली अली मंजुल श्याम के कोमल कण.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (83)