बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 50 of 51
(कवित्त)
कोऊ छत्र लीनै कोऊ छाहगीर कीनै कोऊ,
बीनै ले प्रबीनै ये नवीनें सुर गावती। [1]
कोऊ जरी जोरै कर अतर गुलाब बोरै,
लै लै अलबेली हठी धावन तैं आवती॥ [2]
कोऊ चौर ढारै कोऊ आरती उतारै कोऊ,
करती सलामें कोऊ मुजरा न पावतीं। [3]
बैठी आन तखत पै बखत बिलंद राधे,
बाला दिगपालन की माला पहिरावतीं॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (23)
(कविता) कुओ छत्र लिनै कुओ छाहागिर किनै कुओ, बिनै ले प्रबिनै ये नवीन सूर गावति। [1]. [3] राजसी राधे बाला दिग्पालन की माला पहने सिंहासन पर विराजमान हैं.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (23)