चातुरी पांच गौर सरकार

Radha Trayodashi — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

Verse 1 of 3

चातुरी पांच गौर सरकार। एक चातुरी भ्रूनर्तन की, जेहि लखि पिय बलिहार। एक चातुरी नैन बान की, तिरछी बरछी धार॥ [1] एक चातुरी मृदु बोलनि की, मोहति नंदकुमार। एक चातुरी केली-कला की, प्रकटति रास मझार॥ [2] एक हास-परिहास चातुरी, सखियन संग निहार। कह 'कृपालु' धरि रूप चातुरी, सेवत भानुदुलार॥ [3] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (5) चतुरी पंच गौर सरकार। भरुणर्तन की एक चतुराई, जहाँ हुए लाखों बलिदान। चतुर आँखें, तिरछी भाल की धार.. [1] चतुर मृदु वाणी मोहति नंदकुमार। कला की एक चतुराई, रस मज़हर की एक अभिव्यक्ति.. [2] हास्य की एक चतुराई, दोस्तों के साथ देखें। कह 'कृपालु' धारी रूप चतुरी, सेवत भानुदुलार.. [3] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (5)
चातुरी पांच गौर सरकार