चातुरी पांच गौर सरकार

Radha Trayodashi — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

Verse 2 of 3

छबीली छबि, लखि छबि मानी हार। छवि साकार खरी कर जोरे, सेवत भानु दुलार॥ [1] चँवर ढुरावे सुकुमारी ढिंग, सकल कला साकार। प्यारी सेवा में रह तत्पर, दिव्य प्रभा तनु धार॥ [2] अगनित रति आरती उतारें, करि करि जय जयकार। इक टक् लखत 'कृपालु' लाल जू, निज सुधि देह बिसार॥ [3] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (2) छबीली छबि, लखि छबि मनि हार। छवि को साकार कर सेवत भानु दुलार.. [1] चंवर धुर्वे सुकुमारी धींग, सकल कला अवतरित। अपने प्रियतम की सेवा में तत्पर रहो, दिव्य ज्योति मंद रखो.. [2] करो अग्नि रति आरती, कारी कारी जय जयकार। जब तक 'कृपालु' लाल जू नहीं लिखूंगा, मैं अपने विचार भूल जाऊंगा.. [3] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (2)
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