चातुरी पांच गौर सरकार
Radha Trayodashi — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
Verse 3 of 3
हमारी गौर वरनि सरकार।
पिय चित चोरी भानु किशोरी, अति भोरी रिझवार। [1]
तनु दुति तप्त स्वर्ण दुति ते हूँ, अति उद्दीप्त निहार।
श्री श्रीअंग दिव्य सौरभ ते, सुरभित नन्दकुमार। [2]
श्री श्रीअंग मृदुलता लखि दउँ, कोटि मृदुल्ता वार।
कह 'कृपालु' श्री अंग अंग लखि, पिय सुधि देह बिसार॥ [3]
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (1)
हमारी गौरवशाली सरकार. मधुरहृदय भानु किशोरी अति सुन्दर रीझवार। [1] मैं एक पतले, गर्म सुनहरे धागे की तरह हूं, बहुत उत्साहित दिख रही हूं। श्री श्रीअंग दिव्य सौरभ ते, सुरभित नंदकुमार। [2] श्री श्रीअंग मृदुलता लखि दौं, कोटि मृदुलता वर। कहो 'कृपालु' श्री अंग अंग लखि, पिया सुधि देह बिसर.. [3] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (1)