श्रीवृषभानकिशोरी सुजान

Radhashtakam Stotras —

Verse 10 of 35

(सवैया) श्रीवृषभानकिशोरी सुजान, सुनौं विनती सुधि लेउ हमारी। [1] आपनी जानि कृपा करिकें, हँसि हेरि कहौ सखि आउ हमारी॥ [2] नाम कहूँ गुन गाइ रहूँ, पद-कंज बिना गति है न हमारी। [3] पास रहै परमानंद श्रीहित, राधिका जीवन प्रान हमारी॥ [4] - श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, श्री राधाष्टक (01) (सवैया) श्री वृषभान किशोरी सुजान हमारी विनती सुनो हम पर ध्यान दो। [1] कर दो उपकार अपने चाहने वालों को, मुस्कुरा कर बुलाओ यार.. [2] कहूँ नाम तेरा, न कहूँ क्या, पाँव न हिलाऊँ। [3] परमानंद श्रीहित, राधिका हमारे जीवन का प्राण है.. [4] - श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, श्री राधाष्टक (01)
कृष्ण-गुरु द्युति परा बहु गायमानानमो नमस्तेऽस्तु परात्परायै