कृष्ण-गुरु द्युति परा बहु गायमाना
Radhashtakam Stotras —
Verse 9 of 35
कृष्ण-गुरु द्युति परा बहु गायमाना कृष्णातटे विहरतान्वित कृष्णसारा।
कृष्णेन कंठमनुषंजित दीर्घबाहुः कृष्णप्रिया वसतु मे हृदये सदैव॥
- श्री किशोरी अलि, राधाष्टक (1)
कृष्ण-गुरु द्युति परा बहु गयामाना कृष्णते विहारतनवित् कृष्णसार। कृष्णन कंठमनुश्नाजित दीर्घबाहु: हृदय सदैव कृष्ण की पसंदीदा वस्तु में रहता है। - श्री किशोरी अली, राधाष्टक (1)