अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्

Radhashtakam Stotras —

Verse 27 of 35

अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्, कान्ति पंक्तिभिः प्रतृप्त जाति रूप खंडिनीम्। पूर्ण शादेन्दुनिन्द वक्त्र सुप्रकाशिनीम्, राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥ - श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (3) अंग सन्निधान रत्न मंडल प्रमाणिनाम्, कांति रौबिह प्राप्तरूपेण रूप खंडिनीम्। पूर्ण शेन्दुनिन्द वक्त्रा सुप्रकाशिनीम्, राधिका महान् भजे निकुंज धाम वासिनिम्।।- श्री मोहनचन्द्र जी, श्री राधिकाष्टकम् (3)
राधा रससुधासिन्धु राधा सौभाग्यमञ्जरीअंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्