अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्
Radhashtakam Stotras —
Verse 35 of 35
प्रेमसात यात लोभ हर्षणेन मंडितां। प्रीतिरीति रासकेलि वर्धनाय पंडिताम्॥
प्रेयासी कदम्बमन्त रासदा विलासिनीं। राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥
- श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (5)
प्रेमसत्य यत् लोभा हर्षानेन मंडितम्। प्रीतिरिति रस्केली वर्धनाय पण्डितम्..प्रेयसी कदम्बमन्त रसदा विलासिनिन्.. राधाका महान् भजे निकुंज धाम वासिनिम्.. - श्री मोहनचंद जी, श्री राधाकाष्टकम् (5)