अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्

Radhashtakam Stotras —

Verse 34 of 35

प्रेमपूरि पूरित प्रतेक नेत्र भंगिनीम। प्रेममत्तचित्त नन्द सूनु संग रंगिनीम॥ आलि मंडली विदग्धता समूह शासिनीं। राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥ - श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (4) प्रेमपुरी पूरित प्रतीक नेत्र भंगिनीम्। प्रेमा चित्त नंद सुनु सं रंगिनीम।।अलि मंडली विदग्धाता समुह सासिनी। राधाका महान भजे निकुंज धाम वासिनिम.. - श्री मोहनचंद जी, श्री राधाकाष्टकम् (4)
अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्