अति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथ

Radhika Maharasa — श्री वंशी अलि

Verse 2 of 6

छकन छके जे राधिका, तिनहें न और सुहाय। रसना चाखि अंगूर फल, कहा निबौरी खाय॥ - श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (2) छह हैं राधिका, तीन और हैं सुहाय। अंगूर के रस का आनंद लेना है तो निबोरी खाओ.. - श्री वंशी अली, श्री राधिका महारस, दोहा (2)
अति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथअति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथ