अति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथ
Radhika Maharasa — श्री वंशी अलि
Verse 4 of 6
इतनी कहि हिय विवस ह्वै, रुदन कियौ ब्रजवाल।
मृदु मुसिकात प्रगट भईं, नवकिशोरि तिहिं काल॥
- श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (14)
इतानि कहि ही विवस वै, रूदन कियौ ब्रजावल। मधुर संगीत प्रकट हुआ भाई नवकिशोर तीन दिन पहले.. - श्री वंशी अली, श्री राधिका महारस, दोहा (14)