अति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथ

Radhika Maharasa — श्री वंशी अलि

Verse 5 of 6

मंडल रास रच्यौ बिमल, निर्तति कुँवरि सुजान। ब्रजबाला मिलि सुख बढ़यौ, सब बन वारत प्राण॥ - श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (10) मण्डल रस रचयौ बिमल, निर्मिति कुँवरि सुजान। ब्रजबाला मिलि सुख बधायौ, सब बन वरत प्रान.. - श्री वंशी अली, श्री राधिका महारस, दोहा (10)
अति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथअति अलवेली भाँति सौं लई मुरलिका हाथ