रसिकवर रसिकनी रस रासि

Ras Ke Pada —

Verse 1 of 28

आजु बधाई वृंदावन, सुख-सिंधु हिलोर। प्रियालाल तन-मन हुलसाने, मनसिज-मेघनि घोर॥ [1] सब सखि उमँगि-उमँगि गुन गावैं, नाचत मोर-चकोर। श्रीललितमोहिनी के उर बिहरत, नैंन-कमल चित-चोर॥ [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (62) अजु बधाई वृन्दावन, सुखा-सिंधु हिलोर। प्रियालाल तन-मन हुलसाने, मनसिजा-मेघानी घोर.. [1] सब सखियाँ उमंगी-उमंगी गीत गाती हैं, नाचती हैं मोरा-चकोर। श्री ललितमोहिनी के उर बिहारत, नैन-कमल चिता-चोर.. [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस पद (62)
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