हमरे सुख कौ वपु बन्यौ

Ras Ki Sakhi —

Verse 1 of 6

हमरे सुख कौ वपु बन्यौ, कुंजबिहारिनि बाल। ललित किसोरी लाड़िली, अद्भुत रूप रसाल॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (105) कहाँ सुख हमारा, कुंजबिहारिणी का बल। ललित किशोरी योद्धा हैं, रसाल का रूप अद्भुत है.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, रसाल की सखी (105)
हमरे सुख कौ वपु बन्यौ