हमरे सुख कौ वपु बन्यौ
Ras Ki Sakhi —
Verse 2 of 6
मन सीसी राधा अतर, नख सिख भरी बनाई।
ताहि देखत मोह्यौ साँवरो, भँवर बास लपटाइ॥
- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, रस की साखी (8)
मेरा मन राधा रस से भर गया है, मेरे नखों में स्याही भर गई है। इसलिए देखो मेरे प्रेमियों, भंवर मुझे जरूर लपेट लेता है.. - श्री रसिक देव जी, रस के मित्र श्री रसिक देव जी के वचन (8)