हमरे सुख कौ वपु बन्यौ

Ras Ki Sakhi —

Verse 6 of 6

श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली, परम उदार कृपाल। तोषत पोषत लाल कूँ, रसिक शिरोमणि बाल॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (185) श्री कुंजबिहारिणी प्रियतम, परम उदार एवं दयालु। तोषट पोषत लाल कुण, रसिक शिरोमणि बाल.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की सखी (185)
हमरे सुख कौ वपु बन्यौ