रसिक शिरोमनि सांवरो गौरी अद्भुत रूप
Rasik Mnjari — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 5 of 5
रसिक शिरोमनि सांवरो, गौरी अद्भुत रूप।
विहरत वृंदाविपिन में, विविध विहार अनूप॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (2)
मस्तक की सुन्दर शोभा, गौरी की अद्भुत शोभा। विहारत वृन्दाविपिन पुरुष, विविध विहार अनुप.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (2)