वसिये श्री वृन्दावन धाम
Rasik Vani — रसिक वाणी
Verse 1 of 16
बाँकी चारु चन्द्रिका बिराजै भाल बाँकी खौर,
बाँकी भौहें चंचल चितौन चख बाँकी है। [1]
बाँकी नखबैसर मधुर मुसिकान बाँकी,
कहैं हनुमान बाँकी अधर ललाकी है॥ [2]
मुख शशि भूषण श्रृंगार चन्द्रकला कीन्हैं,
बाँकी पर्यक बैठी मूर झरना की है। [3]
झुकि झुकि झूमि झूमि झाँकी करै देव वधु,
कैसी ये अनुपम श्री राधिका की झाँकी है॥ [4]
- रसिक वाणी
बांकी चारु चंद्रिका बिराजाई, बांकी खौर, बांकी भौहें चंचल छितौं चख बांकी है। [1] बांकी नखबैसर मधुर संगीत बांकी, जहां हनुमान, बांकी अधर ललकी.. [2] मुख कौन, शशि, भूषण, शृंगार, चंद्रकला, बांकी पर्यक बैठी मुर झरना की। [3] झुकी झुकी झुकी झांकी कारी देव वधू, श्रीराधिका की यह झांकी कितनी अनोखी.. [4] - रसिक वाणी