वसिये श्री वृन्दावन धाम

Rasik Vani — रसिक वाणी

Verse 15 of 16

वसिये श्री वृन्दावन धाम। अंग पुलकि निशि दिवस बोलिये, श्री राधे-राधे नाम। [1] ललित-प्रिया जेहि त्यागि परमपद, पायहुँ नहीं विश्राम। भाग बड़ो तब यह व्रज-रज में, पावत मन अभिराम॥ [2] - रसिक वाणी श्री वृन्दावन धाम के निवासी. बोलें अंग पुलकि निशि दिवस, श्री राधे-राधे नमः। [1] ललिता-प्रिया जाहि त्यागी परमपद, पयहु नहिं विश्राम। भाग बढ़ाओ तब ये व्रज-राज पुरुष, पवत मन अभिराम।।[2] - रसिक वाणी
तनक हँस हेरो मेरी ओरवसिये श्री वृन्दावन धाम