मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 1 of 39

(कवित्त) अधर लगाय रस प्याय बाँसुरी बजाय, मेरा नाम गाय हाथ जादू कियो मन में। [1] नटवर नवल सुघर नँदनंदन ने, करिके अचेत चेत हरि के जनत में॥ [2] झटपट उलट-पुलट हट परिधान, जान लागो लालन पै सबै बाम बन में। [3] रस रास सरस रँगीले रसखानि आनि, जानि जोर जुगुति बिलास किए जन में॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (कविता) अधर लागे रस पाय बांसुरी बही, मेरा नाम गी हाथ जादू कियो में। [1]. [3].
मोहनी मोहन सों रसखानि