मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 38 of 39

(सवैया) उन्हीं के सनेहन सानी रहै उन्हीं के जु नेह दिवानी रहैं। उन्हीं की सुनै न औ बैन त्यों सैन सों चैन अनेकन ठानी रहैं॥ [1] उन्हीं सँग डोलन में रसखानि सबै सुख सिंधु अधानी रहैं। उन्हीं बिन ज्यों जलहीन ह्वैं मीन सी आँखि मेरी अँसुवानी रहैं॥ [2] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (सवैया) उनके करीब रहो और उनसे प्यार करो। उसकी बात मत मानना ​​और ऐसे ही बेफिक्र होकर रहना.. [1] उसके साथ सारी सुख-सुविधाएं घाटी में ही रह जाती हैं। उनके बिना मेरे आंसू जलते रहते हैं, जैसे मेरी आंखें जलती हैं.. [2] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि