मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 37 of 39
(सवैया)
सुनियै सबकी कहिये न कछु, रहियै इमि या भव बागर में। [1]
करियै व्रत नेम सचाई लिये, जिन तें तरियै मन सागर में॥ [2]
मिलियै सब सों दुरभाव बिना, रहिये सतसंग उजागर में। [3]
रसखानि गुबिन्दहि यौं भजियै, जिमि नागरि को चित्त गागर में॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) सुनो सब क्या कह रहे हैं, काचू, मूड में रहो या मूड में रहो। [1] सत्य के नाम का व्रत करें, जिसमें मन सागर हो जाए.. [2] सभी पुत्र संकटों से मुक्त हों, वे सत्संग में रहें, मन प्रबुद्ध हो। [3].