भाव अनोखी वस्तु है जो कर जाने कोय

Rup Madhuri Vani — श्री रूप माधुरी

Verse 1 of 3

भाव प्रेम अरु नेम है, भाव ही साधन सार। रूप माधुरी भाव बिन, भटके बारम्बर॥ - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, भाव महिमा अंग (4) भावना प्रेम का नाम है, भावना साधन है। रूप माधुरी भव बिन, बारंबार भटकें.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, भव महिमा अंग (4)
रसविलसनी रसमगन नित