रसविलसनी रसमगन नित

Rup Madhuri Vani — श्री रूप माधुरी

Verse 3 of 3

विपिन वास दैनी प्रिया, करुणा की भंडार। नेक नज़र जापै करै, नाशै कष्ट अपार॥ - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (17) विपिन वास दैनि प्रिया, करुणा का भण्डार। शुद्ध दृष्टि से जपें, कष्ट अपार.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम क्रमांक (17)
रसविलसनी रसमगन नित