जुग मुख छवि बरनी
Saras Dev Vani — श्री सरस देव
Verse 1 of 5
(राग सारंग)
जुग मुख छवि बरनी न परैं री।
उपजत मैंन परस्पर बैंननि नैंननि में मुसकात हरैं री॥ [1]
अंस भुजा दीनैं भीने रँग रहसि बहसि हँसि अंक भरैं री।
विवस भये विहरत पिय प्यारी सरसदास उर संचि धरैं री॥ [2]
- श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (16)
(राग सारंगा) जुग मुख छवि बाराणी न पराई री। उपजत मैं आपसी बन्नाणी नैनाणी में मस्कट हरैण री.. [1] उत्तर भुज दनैण भिने रंग रहसी बाहसी हांसी नंबर भरैण री। विवस भये विहार पिया प्यारी सरसदास उर स्नचि धरैं री.. [2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (16)