राधा वल्लभ भजत भजि भली भली सब होय
Sevak Vani —
Verse 1 of 4
नाम-वाणी निकट श्याम-श्यामा प्रगट,
रहत निशि-दिन परम प्रीती जानी। [1]
नाम-वाणी सुनत श्याम-श्यामा सुबस,
रसद माधुर्य अति प्रेम दानी॥ [2]
नाम-वाणी जहाँ श्याम-श्यामा तहाँ,
सुनत गावंत मो मन जु मानी। [3]
बलित शुभ नाम बलि बिशद कीरति जगत,
हौं जु बलि जाऊँ हरिवंश-वाणी॥ [4]
- श्री सेवक जी, सेवक वाणी (4.18)
नाम और वाणी श्यामा-श्यामा के निकट दिखाई देते हैं, राहत निशि-दीन परम प्रेम के ज्ञाता हैं। [1] नाम-वाणी सुनत श्यामा-श्यामा सुबास, रसद माधुर्य अति प्रेम दानी.. [2] नाम-वाणी जहां श्यामा-श्यामा तहां, सुनत गावंत मो मन जू मणि। [3] बालित शुभ नाम बालि बिषद कीर्ति जगत, हौं जू बालि जौं हरिवंश-वाणी.. [4] - श्री सेवक जी, सेवक वाणी (4.18)