आजु सखी आये मेह सुहाये
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 1 of 35
आजु सखी आये मेह सुहाये।
गौर घटा उमगी आनन्द में महा प्रेम झरि लाये॥ [1]
राजत धनुष चहुँ दिसि नीके छिन छिन रंग सवाये।
श्रीललितकिसोरी रसिक सिरोमनि करत लाल मन भाये॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (45)
आज मेरा दोस्त बहुत खुश है. ध्यान घटता है, उत्साह आनंद में महान प्रेम लाता है.. [1] चांदी का धनुष सुंदर रंगों से भरा होता है। श्री ललित किशोरी रसिक सिरोमनि करत लाल मन भाये.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (45)