आजु सखी आये मेह सुहाये
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 2 of 35
जै जै जै लड़ैती प्यारी की।
कुंजबिहारिनि अति हितकारिनि अद्भुत रूप उज्यारी की॥ [1]
नित्य लाल कौ रंग बढ़ावत हँसि हँसि भुजा सु धारी की।
श्रीललितकिसोरी रसिक सिरोमनि जीवनि प्रान हमारी की॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (54)
जय जय जय दैति प्रिये। कुंजबिहारिणी अत्यंत लाभकारी और अद्भुत तीक्ष्ण रूप वाली है। श्री ललित किशोरी रसिक सिरोमणी हमारे जीवन की जीवनी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (54)