मैं जानी मैं जानी लडैती जू
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 11 of 35
लडैती जू तेरी रङ्ग भरी मुसिक्यानि।
तन मन अति आनंद बढावति, अद्भुत सुख की खानि॥ [1]
परम प्रवीन किसोरी राधे, अति जाननिमनि जानि।
श्रीरसिक सिरोमनि की निजु जीवनि, कुंजबिहारिनि रानि॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (10)
लड़ैती जू तेरी रंग भरी मुसिक्यानि। अति प्रसन्न तन-मन, अद्भुत सुख की कथा.. [1] अति बुद्धिमान लड़की राधे, अति स्नेहमयी नारी। श्रीरसिक सिरोमणी, कुंजबिहारिणी रानी की निजु जीवनी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (10)