मैं जानी मैं जानी लडैती जू

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 13 of 35

मेरी बिहारिनि मेरी मेरी। तन मन, मिलि विहरत रस माती, हँसि हँसि छिन छिन मो तन हेरी॥ [1] हित की जानि करै रुचि सोई, सदाई रहत प्रान सों भेरी। श्रीललितकिसोरी रसिक सिरोमनि, याही सुख में रहत अनेरी॥ [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (89) मेरी बिहारिणी, मेरी मेरी। तन और मन, प्यार और जुनून, हंसी और खुशी, मेरा शरीर बालों वाला है.. [1] दिल खुश है, रुचि खुश है, जीवन हमेशा जीवित है। श्री ललित किशोरी रसिक सिरोमनी, इस सुख में बसती हैं अनेरी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, शृंगार रस के पद (89)
मैं जानी मैं जानी लडैती जूस्यामा नित्य बिहार बनी