कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 35 of 35

तन वन सरस सुहावनों, तरु बेली फल फूल। दंपति नित्य बिहार कल, करत दोऊ समतूल॥ - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (28) सारस का शरीर सुंदर है, पेड़ हैं और उसका पेट फूलों से भरा है। युगल नित्य बिहार कल, करत युगल समतुल.. - श्री रूप सखी के दोहे, श्रृंगार रस (28)
कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल