कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 34 of 35

श्री वृन्दावन कुञ्ज में, करत सुधा रस पान। नागर नवलकिसोर वर, सुन्दर परम सुजान॥ - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (54) श्री वृन्दावन कुंज मन, सुधा रस पीता है। नागर नव किशोर वर, सुन्दर श्रेष्ठ पत्नी.. - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (54)
कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लालकुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल