नित्यविहार सों करि प्रीति

Siddhanta Pada —

Verse 38 of 63

(राग विभास) नित्यबिहार सों करि प्रीति। संग रसिक अनन्य अनुसरि, भाव भक्ति प्रतीति॥ [1] ध्यान चित चिंता रहो नित्य, मानि रसिक की रीति। लाल रूप विलोकि दंपति, लखि जगत बिपरीति॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, सिद्धांत के पद (61) (राग विभास) नित्य बिहार पुत्र कारी प्रीति। संग रसिक और अन्य तदनुरूप भाव भक्ति भक्ति। [1] ध्यान चिंता मणि रसिक विधि। लाल रूप प्रेमी युगल, लखि जग न्यारा। [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी के शब्द, सिद्धांत के छंद (61)
नैंन बिहारी रूप निरखि, रसन बिहारी नाम।नित्य विहार निरंतर मेरो।