सुनी श्रुति तुमही अशरण शरण
Snket Lata — श्री संकेत अली
Verse 9 of 9
सुनी श्रुति तुमही अशरण शरण।
श्रीराधे अभिरामिनि स्वामिनि, विनय सुनिय दैकरण॥ [1]
भटकति भ्रमति जन्म बहु बीते, किये न तुब इस्मरण।
अलिसंकेत जानि शरणागति, राखहु गहि निज चरण॥ [2]
- श्री संकेत अलि, संकेतलता
श्रुति सुनो और मेरी शरण लो। श्रीराधे अभिरामिणी स्वामिनी, विनय सुनिय दैकरण। [1] भटकन, उलझन, जन्म, अनेक बाइट्स, याद क्यों नहीं आता। अली संकेत जनि शरणागति, राखु गहि निज चरण।।[2] - श्री संकेत अली, संकेत लता