दूलह मदनगोपाल राधा नव दुलही

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 92 of 92

(राग धनाश्री) दूलह मदनगोपाल, राधा नव दुलही। मानों तरु तमाल मिलि नूतन, कनक-बेलि उलही॥ [1] रूप-भूप युबराज बिराजत, बैस किसोर एक तुलही। मदनमोहन प्रभु सूर सु जीवनि, जिय में हुती सुलही॥ [2] - श्री सूरदास मदनमोहन (गौड़ीय संत), सूरदास मदनमोहन जी की पदावली (47) (राग धनश्री) दूल्हा मदनगोपाल है, राधा नई दुल्हन है। मनोन तरु तमाल मिलि नूतन, कनक-बेलि उलाहि..[1] रूप-भूप राजकुमार, राजा, बीस किसान, एक मूर्ख। मदन मोहन प्रभु सूर सु जीवनी, जिया में हुति सुलैहि.. [2] - श्री सूरदास मदन मोहन (गौड्य संत), सूरदास मदन मोहन जी की पदावली (47)
Braj-Vasi-Patatar Kou Naahin