आवति बाल लाल रंग भीनी
Vallabh Rasik Vani — श्री वल्लभ रसिक
Verse 1 of 5
(राग देवगिरी)
आवति बाल लाल रंग भीनी।
गावति चुटकिन ताल लगावति हियहिलगावति लचकति अति कटि खीनी॥ [1]
देवगिरी की ताननि की लचि लचकावनि पिय प्राननि लचकनि लीनी।
वल्लभ रसिक विचार विसारि विहारनि पै तन वारि हारि लिखि दीनी॥ [2]
- श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी
(राग देवगिरि) अवति बल लाल रंग भीनी। गावति छुटाकिन ताल लगावती हिहिलागवती लचकति अति कटि खिनि.. [1] देवगिरि की तन्नी की लाची लचकनि पिया प्राणानी लचकनि लिनि। वल्लभ रसिक विचार विहारनि पै तन वारि हरि लिखि दीनी.. [2] - श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक की वाणी